Vivekanada Kendra

Vivekanada Kendra

vk

...

Vivekananda Vani

That love which is perfectly unselfish, is the only love, and that is of God.  -Swami Vivekanada                                                                                                                                                            Slave wants power to make slaves.  -Swami Vivekanada                                                                                                                                                            The goal of mankin is knowledge.  -Swami Vivekanada                                                                                                                                                            In the well-being of one's own nation is one 's own well-being.  -Swami Vivekanada                                                                                                                                                            If a Hindu is not spiritual, I do not call him a Hindu.  -Swami Vivekanada                                                                                                                                                            Truth alone gives strenght........ Strenght is the medicine for the world's disease.  -Swami Vivekanada                                                                                                                                                           

Monday, 30 July 2018

विवेकानन्द केन्द्र बीओआरएल चिकित्सालय में मनाया गया गुरूपूर्णिमा उत्सव

 गुरूपूर्णिमा उत्सव


हम सब अमृत के पुत्र है, यह मानकर श्रेष्ठ कार्य करेंः सुश्री रचना जानी
विवेकानन्द केन्द्र बीओआरएल चिकित्सालय में मनाया गया गुरूपूर्णिमा उत्सव
ध्येय मार्ग अभ्यास वर्ग के तहत कार्यकर्ताओं को बताया केन्द्र प्रार्थना का भावार्थ
बीना। यदि हम अपने कार्य को साधना के रूप में मानकर आगे बढते है, तो हमारे हाथ से किया गया हर कार्य श्रेष्ठ होगा और समाज के लिए उपयोगी साबित होगा। यदि हम अहंकार के साथ कार्य करते हैं, अपने ज्ञान और कर्म पर अहंकार करते हैं, तो हमारी साधना का क्षय हो जाता है। यह बात विवेकानन्द केन्द्र कन्याकुमारी मध्य प्रांत की प्रांत संगठक एवं जीवनव्रती कार्यकर्ता सुश्री रचना जानी दीदी ने गुरूपूर्णिमा के अवसर पर विवेकानन्द केन्द्र बीओआरएल चिकित्सालय में आयोजित गुरूपूर्णिमा उत्सव व ध्येय मार्ग अभ्यास वर्ग के दौरान चिकित्सालय के सभी चिकित्सकों व अन्य सदस्यों के समक्ष अपने उद्बोधन के दौरान कही। इस मौके पर चिकित्सालय के चिकित्सा अधीक्षक डाॅ. सुब्रत अधिकारी व अन्य चिकित्सकों ने भी अपने अपने विचार रखे। 
सुश्री रचना दीदी ने एक कथा के माध्यम से समझाते हुए आगे कहा कि जिस प्रकार एक साधु की साधना के फल स्वरूप जब वह क्रोधित हुआ तो उसके कारण पेड पर बैठा कौआ जलकर भस्म हो गया और कुछ देर बाद जब वह साधु एक गांव में भिक्षा हेतु पहुंचा तो एक महिला घर में भीतर से आवाज लगाकर बोली मैं अभी थोडी देर से आती हूं, साधु दो बार और बोला तो महिला आई और बोली कि मैं वह कौआ नहीं जो आपके क्रोध से भस्म हो जाउं। यह सुनकर साधु अचंभित रह गया। वह उस महिला से बोला तुम्हे कैसे पता तो वह बोली ये बात तुम मेरे गुरू से पूछो, साधु उसके गुरू के पास पहुंचा जो कि एक व्याध अथातर्् कसाई था और अपने हाथों से पशुओं को काटने का कार्य कर रहा था। यह देख साधु और भी आश्चर्यचकित रह गया। तब उस व्याध ने पूरी घटना का परिचय दिया और कहा कि हम जो भी कार्य करें उसे ईश्वर का आदेश और साधना मानकर करें, उसके फल प्रतिफल पर अहंकार ना करें तो हमारा हर कार्य ईश्वर की पूजा है। तुमने साधना के पश्चात् अहंकार से उस कौए को भस्म किया यह अनुचित था।  व्याध द्वारा दिए गए इस ज्ञान को साधु ने आगे चलकर लिखा और उसे ‘व्याध गीता‘ के नाम से जाना गया। 
सुश्री दीदी ने आगे बताया कि केन्द्र प्रार्थना की प्रत्येक पंक्ति हर कार्यकर्ता के लिए अमृत है। इसमें ‘वयं सुपुत्रा अमृतस्य नूनं‘ में कहा गया है, कि हम सब अमृत के पुत्र है। हमारे भीतर अनंत शक्तियां है, उनका उपयोग समाज कार्य के लिए करें। केन्द्र प्रार्थना से हमें आध्यात्मिक शक्ति और अपने कर्मक्षेत्र के लिए आवश्यक उर्जा मिलती है। हमें सदैव याद रखना चाहिए कि हमारा जन्म ईश्वरीय हित की पूर्ति के लिए हुआ है। हमारे हाथों सदैव अच्छे कर्म हों इसका प्रयास करें। अंत में सुश्री रचना दीदी ने कहा कि गुरूपूर्णिमा पर हम अपने गुरू का स्मरण कर कर्मशील रहने का संकल्प लें और एक बेहतर समाज के निर्माण में अपना योगदान दें। 
कार्यक्रम के प्रारंभ में चिकित्सालय के चिकित्सा अधीक्षक डाॅ. सुब्रत अधिकारी ने कहा कि स्वामी विवेकानन्द हमारे इष्ट है, बचपन से हमने उनकी और उनके गुरू ठाकुर श्री रामकृष्ण परमहंस की पूजा की है। हम सब अपने अपने अहंकार को त्यागकर देश हित में कार्य करें। इस मौके पर चिकित्सालय के शल्यचिकित्सक डाॅ. दीपक प्रधान ने कहा कि हम अपने अपने क्षेत्र में बेहतर योगदान दें और जो गरीब मरीज यहां उपचार के लिए आते हैं, उन्हे अच्छे से अच्छा उपचार प्रदान कराएं।
कार्यक्रम में चिकित्सालय के सभी चिकित्सक, नर्सिंग स्टाफ तथा उन्य सदस्य उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन शांति पाठ से किया गया। 

Thursday, 12 July 2018

विवेकानन्द केन्द्र की गतिविधियों व कार्यपद्धति में सक्रिय सहभाग का सभी चिकित्सकों से किया आव्हान


जहां नियति ने पहुंचाया वहीं समर्पित भाव से कार्य करेंः डाॅ. कमलेश उपाध्याय


विवेकानन्द केन्द्र के गुजरात प्रांत सह-संचालक डाॅ. कमलेश उपाध्याय ने दिया प्रेरक व्याख्यान
विवेकानन्द केन्द्र की गतिविधियों व कार्यपद्धति में सक्रिय सहभाग का सभी चिकित्सकों से किया आव्हान 
बीना। हमारा उदेश्य सेवा के माध्यम से मानव निर्माण का होना चाहिए। हम मनुष्य निर्माण से राष्ट्र का पुनरूत्थान करना चाहते हैं, ये भाव हमारे भीतर सदैव निहित होना चाहिए। सभी का कार्यक्षेत्र प्रारब्ध से मिलता है, नियति ने हमें जहां पहुंचाया है, वहीं हमें समर्पित भाव से कार्य करना चाहिए। मनुष्य में आज बौद्विक संपदा तो बहुत है, किन्तु भावनात्मक रूप से हम पिछड रहे है। ऐसे में हमें नई पीढि के बीच भावनात्मक संबधों का विकास और उनका परिवर्धन कैसे हो इस पर ध्यान देना चाहिए।  हम चिकित्सक है, समाज हमें बहुत मान-सम्मान देता है, हमारी बात को लोग एक नजीर के रूप में लेते है। ऐसे में हमारा कर्तव्य है, कि हम विवेकानन्द केन्द्र की कार्यपद्धति में सहभागी हों और लोगों को प्रेरणा दें। यदि हम संस्कार वर्ग, केन्द्र वर्ग में जाएंगे तो वहां के बच्चे और पालक हमारी बातों को ध्यान से सुनेगे और हमारी बात को जीवन में अपनाने का कार्य करेंगे। केन्द्र के संस्कार वर्ग में हम समय निकाल कर अवश्य जहां जो कि मनुष्य निर्माण का एक बेहतर माध्यम है। 
यह बात विवेकानन्द केन्द्र कन्याकुमारी के गुजरात प्रांत के सह प्रांत संचालक  डाॅ. कमलेश उपाध्याय ने विवेकानन्द केन्द्र बीओआरएल चिकित्सालय में प्रवास के दौरान आयोजित कार्यक्रम में चिकित्सालय परिवार के सदस्यों के बीच कही। कार्यक्रम का शुभारंभ मंगलाचरण से किया गया तत्पश्चात् डाॅ. कमलेश जी उपाध्याय का विस्तृत परिचय व स्वागत भाषण चिकित्सालय के चिकित्सा अधीक्षक डाॅ. सुब्रत अधिकारी ने किया। 
डाॅ. कमलेश जी ने आगे कहा कि आज समाज एकल परिवार की संकल्पना की ओर बढ रहा है, जो कि भविष्य के लिए घातक है, हमारा परिवार बडा होना चाहिए। बडे परिवार में बच्चों का सम्पूर्ण विकास होता है। हमारा प्रयास हो कि हमारे बच्चों में राष्ट्र और समाज को आगे लाने का भाव हो और कम से कम एक संतान हमारी राष्ट्रीय जागरण और राष्ट्र के पुनरूत्थान के कार्यों में सक्रिय रहकर योगदान दे हम ऐसे संस्कार संतान को दें। बडे परिवार जहां कुटुम्ब का भाव हो वहां सस्कृति का रक्षण और संवर्धन होता है, ऐसे परिवार में आध्यात्मिक का भाव भी बढता हैै। हमारे भीतर आध्यात्मिकता का भी भाव रहना चाहिए। हर व्यक्ति को अपनी क्षमता से अधिक कार्य करने की आदत विकसित करनी चाहिए। हम क्षमता से ज्यादा कार्य करें और मनुष्य निर्माण की प्रक्रिया और गतिविधियों में सक्रिय सहभाग रखें। उन्होने आगे कहा कि हमारे देश में स्वच्छता को लेकर तेजी से जागरूकता बढ रही है। हमें साफ पानी के उपयोग पर ध्यान देना चाहिए। वहीं बच्चों को रोगों से बचाने के लिए हाथ धोने की वैज्ञानिक विधि का प्रशिक्षण भी देना चाहिए। उन्होने सभी से 10 स्टेप में हाथ धोने का प्रत्याक्षिक (डेमो) भी कराया।  वहीं सभी  से आग्रह भी किया कि सप्ताह में कम से कम एक दिन सायकल अवश्य चलाएं। अंत में उन्होने कहा कि अपने जीवन को ध्येयपूर्ण जीवन बनाएं यदि ध्येय नहीं है, तो हम सच्चे अर्थों में मनुष्य नहीं हो सकते है। हमें समाज और राष्ट्र के आगे बढने हेतु अपना भी योगदान और स्थान तय करें। इस अवसर पर विवेकानन्द केन्द्र कन्याकुमारी की भोपाल शाखा के सह नगर प्रमुख श्री किशोर जी वालुंजकर ने भी अपने विचार रखे। कार्यकम्र में चिकित्सकों ने भी अपने अपने विचार रखे। 
अंत में चिकित्सा अधीक्षक डाॅ. अधिकारी ने अतिथियों का विवेकानन्द साहित्य और स्मृति चिन्ह भेंट कर अभिनंदन किया। अतिथियों का आभार चिकित्सालय के निश्चेतना विषेशज्ञ डाॅ. भूपेन्द्र सिंह ने व्यक्त किया। कार्यक्रम चिकित्सालय के सभी चिकित्सक व अन्य सदस्य उपस्थित रहे।